Thursday, October 15, 2026

साधना शक्ति संचय का आधार


साधना शब्द संस्कृत के साध् धातु से बना है जिसका अर्थ होता है पूरा करना, सिद्ध करना। इसे यूं  भी कहा जाता है साधने की क्रिया ही साधना है। साधना को हम मोटे तौर पर निम्न रूपों में अभिव्यक्त कर सकते हैं-  शरीर की साधना जो कि शारीरिक दृष्टि से व्यक्ति को सबल बनाती है शारीरिक सबलता का आधार योग व्यायाम एवं सात्विक  भोजन आदि पर टिका होता है। दूसरी साधना है मन की साधना। मन की साधना कहने का अभिप्राय यहां एकाग्रचित, विवेकशील और आत्मविश्वासी मन से है, जो कि ध्यान, सकारात्मक चिंतन से परिपुष्ट होता है। तीसरी साधना कर्म की साधना अपने काम को पूरी ईमानदारी और मेहनत से करना ही कर्म की साधना है।

तीनों प्रकार की साधना का परिचय प्राप्त करने के बाद हम यह भी कह सकते हैं कि किसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किया गया निरंतर, अनुशासित एवं पवित्र अभ्यास ही साधना है। साधना  के बिना शक्ति अर्जन संभव ही नहीं है और बिना शक्ति के अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर लेना कोरी कल्पना मात्र है। भारतीय संस्कृति में  शक्ति उपासना का त्योहार नवरात्र काल साधना के लिए बहुत उत्तम माना गया है, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार इस समय प्रकृति, साधना के लिए बहुत फलदायी सिद्ध होती है। हमारे विद्यालय समय-समय पर अनेकानेक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थी जीवन के लिए साधना के महत्व को बच्चों के मानस में स्थापित करते हैं। विद्यार्थी जीवन के लिए साधना ज्ञान, विवेक एवं एकाग्रता को उत्पन्न करने वाली है, यहीं से जीवन श्रेष्ठतम लक्ष्यों के लिए गतिमान होने लगता है। प्रत्यक्ष देखने में तो बड़ी सफलता चमत्कार ही लगती है, लेकिन इसके मूल में देखा जाए तो सफलता व्यक्ति के वर्तमान एवं पूर्व में की गई अनवरत साधना का ही परिणाम है। यही साधना सामान्य व्यक्ति के जीवन में असामान्य उपलब्धियां जागृत करती है, उसे हर परिस्थिति में समायोजन करना सिखाती है। यही साधना एक सैनिक के जीवन में प्रबल साहस का संचार कर इसे विजय श्री दिलाती है। भारतीय मनीषा में इस पूरे आख्यान में साधना के उद्देश्य को भी शामिल किया गया है। इसका अभिप्राय यह हुआ कि उद्देश्य की पवित्रता भी साधना को पूर्ण सफल बनाने वाली है। राक्षसी प्रवृत्ति वाले अनेक लोगों ने बहुत साधना करने के बाद भी सफलता तो पाई लेकिन उद्देश्य सही नहीं रहने के कारण वह साधना उनके विनाश का ही कारण बनी। उत्तम उद्देश्यों को लेकर चलने वाले महापुरुषों के जीवन में साधना उनके व्यक्तित्व को भी महान बनाती है एवं लोकमंगल का हेतु भी बनती है। प्रत्येक विवेकशील प्राणी को साधना के महत्व एवं उद्देश्य की पवित्रता दोनों को समझ कर अपने जीवन को सफल बनाना चाहिए।

साधना शक्ति संचय का आधार

साधना शब्द संस्कृत के साध् धातु से बना है जिसका अर्थ होता है पूरा करना, सिद्ध करना। इसे यूं  भी कहा जाता है साधने की क्रिया ही साधना है। साध...